You are welcome for visit Mera Abhinav Ho Tum blog

Saturday, August 2, 2014

कई कश्ती को

कई कश्ती को किनारों से बिछुड़ते देखा
कई पतवार को मझधार में टूटते देखा

नहीं देखा कभी हद मैनें बेबफाई का 

नाज था जिनको कभी समंदर पे
प्यास से उसको भी तड़पते देखा ।।