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Friday, September 22, 2017

जिज्ञासा और संघर्ष

हर एक शाम एक नई तमन्ना
एक नई जिंदगी की उम्मीद लिए
हर एक पल को,
खुशियों से सजाने की आश लिए
सोता है इंसान ।


और खो जाता है, रात की गहराइयों में
अपने पलकों पर, हजारों सपने लिए
और सुबह ढूँढता है अपनी पहचान।


फिर कोसता है, अपनी तकदीर को
बार बार अपने आप को हारा समझ कर,
और फिर भूल जाता है अपना ईमान
लुटा देता है सारी खुशियाँ
कर देता है अपना सबकुछ  नीलाम।


सिर्फ एक चाह के पीछे
कि अब बनना है मुझे भी धनवान,
और बन जाता है वह हैवान।

हर एक शाम एक नई तमन्ना..

विवशता कैसी भी हो, तड़प कैसी भी हो,
प्यार कैसा भी हो, दर्द जैसा भी हो
कोई मंजील न हो, कोई राही न हो।
चाहे कितनी भी मुश्किलें हो
मगर,


ईमानदारी और सच्चाई का दामन थामे
धैर्य की कवच पहने,
साहस से जो लेता है काम
सचमुच वही है आज इंसान।
जो अपनी मुक्कदर खुद बना सकता है
बन सकता है खुद का भगवान।।


हर एक शाम एक नई तमन्ना
एक नई जिंदगी की उम्मीद लिए
हर एक पल को,
खुशियों से सजाने की आश लिए
सोता है इंसान।।