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Sunday, August 10, 2014

सावन आ गई

अब आये दिन बहार के
खुशियों के त्योहार के
भाई और बहनों के
मिलने के इंतिजार के ।

कभी दूर भाई तो
सावन की झूलों में
तिलक राखियों से सजी
भाइयों को खुशियाँ भी


कभी दूर बहना
जब हुए साथ तो
खिल उठे अंगना ।

झूल रही बहना
सोचती है लूँगी मैं
सोने की कंगना ।

थाल आ गई
अब तो सावन की
मिशाल आ गई
आरती के संग
लड्डू लाल आ गई ।

कमाल आ गई
लगता है सावन की
बहार आ गई ।।