You are welcome for visit Mera Abhinav Ho Tum blog

जिंदगी वो जिंदगी

जिंदगी वो जिंदगी
मुझसे मत कर दिल्लगी
हूश्न की महफिल में
जानें बना गई क्यूँ अजनवी


रूठ जाएगी इस कदर
हमको ना थी इसकी खबर
मिलनें की तुझसे आरजू में
बढ़ते रहे अपने डगर


अब आती ना झलकें यार की
ना प्यार की परछाईयाँ
फिर भी मिलन की आश में
मन ले रही अंगराईयाँ


शायद मिटा पाउँगा दिल से
तेरी ये रूसबाईयाँ
बदल गई क्यूँ इस कदर
जैसे की समतल खाईयाँ


जिंदगी के हर सफर में
बस तेरी ही है कमी
जिंदगी वो जिंदगी
मुझसे मत कर दिल्लगी ।।