You are welcome for visit Mera Abhinav Ho Tum blog

Monday, November 17, 2014

जब भी शर्म और हया की

जब भी शर्म और हया की
आँचल में सिमट के आती हो


ऐ बेकरार दिल फिर से
मिटने को मचल जाता है


सच तो है कि ये तेरी
हूर सी सूरत को देखकर


तुझको चाहने वाला भी
खुद को भूल जाता है ।।