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Thursday, December 4, 2014

जा रहा हूँ

जा रहा हूँ इस मौसम में
उनके पास-पास रहके
मिलूँ या मिलूँ फिर दिल से
उनके साथ-साथ रहके ।


हजार गम है खुशियाँ है
प्यार के इस मौसम में
मैं खुद बहक चुका हूँ
बहकी-बहकी बात सुनके ।


तरस जाता हूँ तड़प जाता हूँ
एक मुस्कान के खातिर
जब वो ना माने रो लेता हूँ
यूँ ही तन्हा-तन्हा रहके ।


प्यार अब भी बाकी है
पतझड़ के इस मौसम में
मुझे विश्वास है पूरी होगी
मिलन की आशायें लेके ।


जा रहा हूँ इस मौसम में
उनके पास-पास रहके ।।